तक

483.50

NSE

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BSE
  • तक
  • 483.50NSE
  • 483.55BSE

0

एमएमटीओई का उत्पादन (24-25 में)

0

करोड़ निवल मूल्‍य (24-25 तक)

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कुल क्षेत्रफल (वर्ग किलोमीटर में)

0

मीटर खुदाई की गई (23-24 में)

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देश - वैश्विक उपस्थिति

एक एकीकृत ऊर्जा कंपनी

नया क्‍या है

    इस अनुभाग के लिए कोई सक्रिय रिकॉर्ड नहीं है।

स्‍थिरता
  • ईएसजी प्रतिबद्ध ईएसजी प्रतिबद्ध ईएसजी प्रतिबद्ध
  • 2040 तक नेट जीरो 2040 तक नेट जीरो 2040 तक नेट जीरो
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा स्वास्थ्य और सुरक्षा स्वास्थ्य और सुरक्षा
ESG-Commitment
ईएसजी प्रतिबद्ध
ईएसजी प्रतिबद्धताओं के माध्यम से, ओआईएल का उद्देश्य सतत विकास और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन में योगदान करते हुए स्थायी मूल्य बनाना है.....
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ESG-Commitment
2040 तक नेट जीरो
2040 तक नेट जीरो
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ESG-Commitment
स्वास्थ्य और सुरक्षा
OIL fosters a culture of safety and accountability across its operations, aiming to achieve zero harm and maintain the well-being of all stakeholders.
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सामुदायिक सहभागिता
सामाजिक परिसंपत्तियों का विकास
सामाजिक परिसंपत्तियों का विकास
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कला, संस्कृति और विरासत का संवर्धन
कला, संस्कृति और विरासत का संवर्धन
इसका उद्देश्य सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध करने, सामुदायिक रिश्‍तों को मजबूत करने, और जहाँ यह काम करता है, वहाँ के क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास और कल्‍याण करने में योगदान देना है।
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स्‍थायी पर्यावरण
स्‍थायी पर्यावरण
ओआईएल पर्यावरण की रक्षा करने और अपने कार्य क्षेत्रों में पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के महत्व को पहचानता है।
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स्‍थायी आजीविका
स्‍थायी आजीविका
बहु-फसल/ फसल अवधि/ नकदी फसल के लिए खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाना, जिससे कृषि उत्‍पादन को अधिकतम किया जा सके।
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स्वच्छ भारत अभियान
स्वच्छ भारत अभियान
स्कूल और सामुदायिक शौचालयों/ आईएचएचएल (3060 शौचालय) का निर्माण, कामाख्या मंदिर को स्वच्छ प्रतिष्ठित स्थान के रूप में विकसित करना।
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दिव्‍यांगजनों का कल्याण
दिव्‍यांगजनों का कल्याण
ऑयल इंडिया लिमिटेड का उद्देश्य बाधाओं को दूर करना, कलंक को कम करना और दिव्‍यांगजनों को सार्थक और सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर प्रदान करना है।
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खेलों को बढ़ावा
खेलों को बढ़ावा
ऑयल इंडिया लिमिटेड अपने व्यापक सीएसआर लक्ष्यों के अनुरूप, अपने प्रचालन वाले क्षेत्रों में सामुदायिक विकास, सामाजिक समानता और समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए खेलों को प्रोत्‍साहन देता है।
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कौशल निर्माण
कौशल निर्माण
इसका उद्देश्य अपने समुदायों में लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसरों में सुधार करना है।
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शिक्षा
शिक्षा
ऑयल इंडिया लिमिटेड विभिन्‍न स्तरों और लक्षित समूहों के लिए शिक्षा को प्रोत्‍साहित करने, अधिक अवसर पैदा करने और लोगों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है।
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स्वास्थ्य
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, स्वास्थ्य देखभाल संबंधी कमियों को दूर करने और लोगों के समग्र कल्याण को बढ़ाने में सहायता करना।
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महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण
ऑयल इंडिया लिमिटेड महिलाओं को सशक्त बनाने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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1889
ओआईएल का शानदार सफर
साल 1889

देश में कच्चे तेल की पहली व्यावसायिक खोज डिगबोई में की गई थी।

ऑयल इंडिया लिमिटेड की शुरुआत 1889 में हुई, जब देश में पहली बार डिगबोई, असम में वाणिज्यिक स्तर पर कच्चा तेल मिला। डिगबोई के जंगलों से शुरू हुई यह खोज धीरे-धीरे पूरे भारत में तेल-गैस खोज को बढ़ावा देने लगी। डिगबोई क्षेत्र में पहला कुआँ असम रेलवे एंड ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड (एआरएंडटी कंपनी लिमिटेड) द्वारा खोदा गया था। इसके बाद एआरएंडटी ने 1899 में असम ऑयल कंपनी (एओसी) की स्थापना की, ताकि अपने पेट्रोलियम हितों का प्रबंधन किया जा सके। बाद में, 1911 में यूके स्थित बर्मा ऑयल कंपनी (बीओसी) असम के ऊपरी हिस्से में आई और एओसी के पेट्रोलियम हितों को अपने अधीन ले लिया।

गौरवशाली यात्रा
1953
ओआईएल का शानदार सफर
साल 1953

स्वतंत्र भारत में हाइड्रोकार्बन की पहली खोज नहरकटिया में की गई थी।

इसके बाद 1891 में नियमित रूप से तेल की खुदाई शुरू हुई। आज़ाद भारत में पहली बार तेल और गैस 1953 में असम के नाहरकटिया में मिली। इसके बाद 1956 में मोरान में भी खोज हुई। आज़ादी के बाद भी कई वर्षों तक तेल उद्योग विदेशी कंपनियों के नियंत्रण में रहा। बर्मा ऑयल कंपनी (बीओसी) अपने कामकाज के अंत तक भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी बनी रही।

गौरवशाली यात्रा
1959
ओआईएल का शानदार सफर
साल 1959

ऑयल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को_____का अधिग्रहण करने के लिए भारतीय रुपए कंपनी के रूप में निगमित किया गया था।

इस बीच, 18 फरवरी 1959 को नाहरकटिया और मोरान क्षेत्रों के विकास और उत्पादन के साथ-साथ असम में तेल-गैस की खोज को तेज़ करने के लिए ऑयल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाई गई। यह कंपनी असम में बर्मा ऑयल कंपनी के काम को संभालने के लिए बनाई गई थी। शुरुआत में इसमें दो-तिहाई हिस्सेदारी असम ऑयल कंपनी/बर्मा ऑयल कंपनी की थी और एक-तिहाई हिस्सेदारी भारत सरकार की थी। 1961 में ओआईएल को संयुक्त उद्यम कंपनी बना दिया गया, जिसमें दोनों की हिस्सेदारी बराबर हो गई। ओआईएल ने 1969 में कुसिजन तेल क्षेत्र और 1972 में जोराजन तेल क्षेत्र खोजे। इसके बाद 1973 में असम के टेंगाखाट क्षेत्र में ईओसीन गैस की खोज की गई।

गौरवशाली यात्रा
1981
ओआईएल का शानदार सफर
साल 1981

ओआईएल एक पूर्ण पीएसयू के रूप में भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व वाला उद्यम बन गया।

1970 के दशक के अंत तक भारत के अन्वेषण एवं उत्पादन (ईएंडपी) उद्योग पर दो राष्ट्रीय तेल कंपनियों—ओएनजीसी और ओआईएल—का वर्चस्व था। इन्हें नामांकन के आधार पर पेट्रोलियम अन्वेषण लाइसेंस दिए जाते थे। उस समय अन्वेषण मुख्य रूप से थल क्षेत्रों और उथले अपतटीय क्षेत्रों तक ही सीमित था। भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी निवेश, तकनीक और पूंजी आकर्षित करने हेतु सरकार ने 1979 में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल की और निविदा प्रक्रिया के माध्यम से ब्लॉकों की पेशकश शुरू की। इसके बाद 1981 में सरकार ने ओआईएल का अधिग्रहण कर लिया और यह एक पूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) बन गया।

गौरवशाली यात्रा
2006
ओआईएल का शानदार सफर
साल 2006

ऑयल इंडिया ने भारत और विदेशों में विस्तार करते हुए विकास और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना जारी रखा है।

ऑयल इंडिया ने लगातार आगे बढ़ते हुए देश के साथ-साथ विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई। सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी बनने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए ओआईएल ने भारत से बाहर अवसर तलाशने की जरूरत को समझा। इसलिए विदेशों में कारोबार के मौके तलाशना कंपनी की अहम रणनीति बना। केवल 4–5 वर्षों के भीतर ही ओआईएल ईरान, लीबिया, गैबॉन, सूडान, यमन और नाइजीरिया जैसे 6 देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका था। कंपनी का ध्यान पश्चिमी अफ्रीका, सीआईएस देशों और मध्य-पूर्व क्षेत्र पर भी रहा। ईरान के फारसी ब्लॉक में भारी तेल की खोज के साथ ओआईएल को विदेशों में अपनी पहली बड़ी सफलता भी मिली।

गौरवशाली यात्रा
2010
ओआईएल का शानदार सफर
साल 2010

ओआईएल ने अपना आई्रपीओ लॉन्च किया और नवरत्न का दर्जा प्राप्त किया

ऑयल इंडियंस की निरंतर मेहनत और दृढ़ प्रतिबद्धता के कारण तेल और गैस उत्पादन में हर साल 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। इससे कंपनी के मुनाफे में भी वृद्धि हुई। कंपनी के शेयर सितंबर 2009 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुए। ओआईएल का आईपीओ अब तक का सबसे महंगा पीएसयू आईपीओ रहा और इसे 31 गुना से अधिक लोगों ने खरीदा। इसके बाद 2010 में ओआईएल को नवरत्न का दर्जा प्रदान किया गया।

गौरवशाली यात्रा
2018
ओआईएल का शानदार सफर
साल 2018

ओआईएल ने सौर ऊर्जा संयंत्र और पवन फार्म स्थापित करके नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करना शुरू किया।

2012 में ओआईएल ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में कदम रखा और व्यावसायिक स्तर पर सौर व पवन ऊर्जा परियोजनाएँ शुरू कीं। इसका उद्देश्य अपनी ऊर्जा गतिविधियों का विस्तार करना था। 2018 में कंपनी ने नगर गैस वितरण (सीजीडी) क्षेत्र में कदम रखा, ताकि ऊर्जा श्रृंखला को और मजबूत किया जा सके। इसके लिए असम गैस कंपनी लिमिटेड (एजीसीएल) और ओआईएल ने मिलकर एक संयुक्त कंपनी बनाई, ताकि असम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में नगर गैस वितरण नेटवर्क बिछाया जा सके। इस संयुक्त उद्यम में असम सरकार की एजीसीएल की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है और ओआईएल की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

गौरवशाली यात्रा
2021
ओआईएल का शानदार सफर
साल 2021

ओआईएल ने नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) में व्‍यापक हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जिसके पास असम में एक आधुनिक 3 एमएमटीपीए रिफाइनरी है।

25 मार्च 2021 को ओआईएल ने असम की आधुनिक नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी, जिसकी क्षमता 3 एमएमटीपीए है। इसके बाद ओआईएल, एनआरएल की प्रमोटर और होल्डिंग कंपनी बन गई। यह केवल एक कारोबारी फैसला नहीं था, बल्कि तेल-गैस क्षेत्र में ओआईएल की प्रगति का एक अहम कदम था, जिससे पूरी तेल-गैस श्रृंखला में जुड़ाव मजबूत हुआ। एनआरएल की क्षमता बढ़ाने की बड़ी परियोजना और पूर्वोत्तर में ओआईएल की नई व मौजूदा तेल-गैस खोज योजनाओं के साथ, यह संयुक्त प्रयास देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और पूर्वोत्तर हाइड्रोकार्बन विज़न 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौरवशाली यात्रा
2023
ओआईएल का शानदार सफर
साल 2023

ओआईएल को प्रतिष्ठित महारत्न का दर्जा दिया गया, जिससे कंपनी 13वीं महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम बन गई।

वित्तीय वर्ष 2022–23 में कंपनी ने बहुत अच्छा वित्तीय प्रदर्शन किया। इस दौरान कंपनी का वार्षिक कारोबार ₹41,039 करोड़ रहा और शुद्ध लाभ ₹9,854 करोड़ दर्ज किया गया। इसके बाद 2023 में ऑयल इंडिया लिमिटेड को प्रतिष्ठित महारत्न का दर्जा मिला, जिससे यह देश की 13वीं महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बनी। इस उपलब्धि के साथ कंपनी की जिम्मेदारियाँ और अपेक्षाएँ और बढ़ गईं, जिसने ऑयल इंडियंस को राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। नए उत्साह और ऊर्जा के साथ ऑयल इंडियंस लगातार बेहतर काम, नवाचार और नई उपलब्धियों की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

गौरवशाली यात्रा
1889
1953
1959
1981
2006
2010
2018
2021
2023
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