एचएसई प्रबंधन प्रणाली
ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण (एचएसई) के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह प्रतिबद्धता ओआईएल के प्रबंधन और कार्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एचएसई प्रणाली से बेहतर संवाद, लक्ष्यों को हासिल करने, कर्मचारियों के विकास और कामकाज की प्रक्रिया में सुधार होता है। सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण हमारे व्यवसाय के प्रदर्शन का अनिवार्य हिस्सा हैं। ओआईएल में सभी गतिविधियों/ कार्यों को एचएसई से जोड़कर संयुक्त रूप से काम किया जाता है। यह हमारी सक्रिय और जिम्मेदार सुरक्षा संस्कृति को दर्शाता है। कंपनी का मानना है कि अधिक उत्पादन केवल सुरक्षित कामकाज और सही प्रक्रियाओं से ही संभव है। इसलिए एचएसई प्रबंधन को सभी विकास कार्यों के केंद्र में रखा गया है। सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों को सही दिशा देने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ओआईएल में एक अलग विभाग है। इस विभाग में प्रशिक्षित और समर्पित कर्मचारी कार्यरत हैं तथा इसके लिए पर्याप्त बजट भी उपलब्ध कराया जाता है। ओआईएल की एक स्पष्ट रूप से परिभाषित एचएसई नीति भी है, जिसके तहत कंपनी अपने कर्मचारियों, उनसे जुड़े लोगों, मशीनों, पर्यावरण और आसपास रहने वाले समुदाय की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
ओआईएल की एचएसई नीति सुरक्षित सुविधाओं और सुरक्षित कार्य वातावरण पर जोर देती है। यह सुरक्षित कार्य प्रक्रियाओं, दुर्घटनाओं की रोकथाम और दुर्घटनाओं से होने वाले काम के नुकसान (डाउनटाइम) को कम करने के लिए प्रभावी प्रशिक्षण पर ध्यान देती है। साथ ही, यह व्यावसायिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने पर केंद्रित है। इन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए, ओआईएल ने विश्व स्तरीय एचएसई मानकों को अपनाने हेतु निम्नानुसार विभिन्न नीतियाँ, प्रणालियाँ, प्रक्रियाएँ और दिशानिर्देश स्थापित किए है
ओआईएल में एचएसई प्रबंधन प्रणाली
- एचएसई नीतियाँ
- सुरक्षा नियमावली, नियम एवं विनियम
- संगठनात्मक संरचना
- संभावित जोखिम एवं खतरे की पहचान तथा प्रबंधन करना
- एचएसई के प्रति जागरूकता बढ़ाना, जिसमें परिवार भी शामिल हैं
- उपकरणों एवं मशीनरी का निरीक्षण, परीक्षण एवं अनुरक्षण
- मानक संचालन प्रक्रियाएँ
- परिचालन गतिविधियों हेतु प्रक्रियाएँ
- एचएसई प्रशिक्षण
- परिवर्तन प्रबंधन
- ऑडिट, निरीक्षण एवं अनुपालन की निगरानी
- आपातकालीन तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया की योजना
- एचएसई प्रदर्शन की निगरानी एवं समीक्षा
- व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का प्रबंधन एवं निगरानी
- ठेका/संविदा प्रबंधन
- एचएसई बैठकें
- दुर्घटना रिपोर्टिंग, जाँच एवं विश्लेषण
- दस्तावेज़ीकरण और रिकॉर्ड का सही रख-रखाव
- कर्मचारी सहभागिता
- व्यावसायिक स्वास्थ्य निगरानी
- पर्यावरण प्रबंधन
- अग्नि रोकथाम एवं सुरक्षा व्यवस्था

खतरे को पहचानना
सभी गतिविधियों, उत्पादों और सेवाओं से जुड़े संभावित खतरों, उनके प्रभाव, जोखिम और परिणामों की पहचान के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाती है। उपयोग की जाने वाली विधियाँ कार्य की जटिलता और पहले से मौजूद जोखिम के स्तर पर निर्भर करती हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- अनुभव के आधार पर निर्णय लेना
- ढांचागत समीक्षा तकनीकों का उपयोग
- पहले से तैयार जांच-सूचियों का उपयोग
- उद्योग में मान्य कोड, मानकों और दिशानिर्देशों का पालन करना

जोखिम आकलन
जोखिम, खतरे के परिणाम और उसकी गंभीरता से जुड़ा होता है। इसे इस तरह मापा जाता है:
जोखिम = खतरे की गंभीरता × होने की संभावना
पहले से पहचाने गए खतरों से जुड़े जोखिमों की पहचान की जाती है। जोखिम का आकलन खतरे के प्रभाव (कितना नुकसान और कितना गंभीर) और उसके होने की संभावना के आधार पर किया जाता है। जोखिम आकलन के दौरान यह भी देखा जाता है कि किन लोगों (तीसरे पक्ष सहित), संपत्तियों और पर्यावरण पर इसका असर पड़ सकता है। इसमें संवेदनशील स्थानों और लोगों की पहचान भी शामिल होती है, जैसे— स्थान, प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या और उनकी खतरे से दूरी।

कार्य करने से पहले अनुमति लेना
कार्य करने से पहले अनुमति लेने की प्रक्रिया का उद्देश्य गैर-नियमित कार्यों से जुड़े खतरों की पहचान करना और हर पहचाने गए खतरे के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय तय करना है।
हाइड्रोकार्बन प्रोसेसिंग/ हैंडलिंग उद्योग में काम करते समय असामान्य जोखिम होते हैं। इसलिए सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ बनाने और काम को सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए एक मानकीकृत और समान प्रक्रिया को मार्गदर्शक के रूप में अपनाया जाता है।

सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरणों की बाईपास और बहाली की नीति
इस नीति का मुख्य उद्देश्य उन सभी स्थितियों में जोखिम का आकलन करना और उसे कम करना है, जहाँ सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण को बाइपास किया जाता है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि बाइपास की प्रक्रिया सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से हो। इसके अलावा, जब भी किसी सुरक्षा-महत्वपूर्ण उपकरण को, चाहे नियमित काम के लिए हो या आपात स्थिति में, बाइपास करना पड़े, तो इसके लिए उचित अनुमति और स्वीकृति की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे संबंधित अधिकारियों को समय पर जानकारी मिलती है और वे किसी भी स्थिति में सही तैयारी के साथ कार्रवाई कर सकते हैं।

परिवर्तन प्रबंधन
संगठन, प्रबंधन, कर्मचारी, उपकरण, प्रक्रियाएँ और कार्यविधियों में किए गए बदलाव एचएसएसई प्रदर्शन को नुकसान पहुँचा सकते हैं या पहले किए गए जोखिम आकलन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए परिवर्तन प्रबंधन प्रक्रिया बहुत जरूरी है। इस प्रक्रिया के तहत किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले उसे दर्ज किया जाता है और उसके प्रभावों का पूरा मूल्यांकन किया जाता है। इसमें मूल योजना, डिज़ाइन, उपकरण, मान्यताएँ, कोड, मानक, प्रक्रियाएँ और एचएसएसई प्रबंधन प्रणाली के पहलू (जैसे कानूनी आवश्यकताएँ, संगठन की संरचना और जिम्मेदारियाँ) शामिल होते हैं।

आपातकालीन तैयारी एवं मॉक ड्रिल
ओआईएल में गंभीर घटनाओं का प्रभावी और तेज़ी से सामना करने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली बनाई गई है। कंपनी के सभी स्तरों पर प्रभावी योजनाएँ उपलब्ध हैं, जिनसे गंभीर घटनाओं का सही ढंग से प्रबंधन होता है और महत्वपूर्ण कार्य और सेवाएँ जल्दी बहाल की जाती हैं। ओआईएल में चार-स्तरीय आपदा प्रबंधन योजना लागू है, जिससे किसी भी ऑपरेशन इकाई में गंभीर घटना होने पर तुरंत सही कार्रवाई और आवश्यक प्रबंधन तथा संसाधनों की व्यवस्था की जा सके।

ठेकेदार कार्मिक सुरक्षा प्रबंधन
ओआईएल की नीति है कि ठेकेदार भी ऐसी प्रबंधन प्रणाली के तहत काम करें, जो ओआईएल की एचएसएसई प्रणाली की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। ओआईएल और ठेकेदारों और उप-ठेकेदारों की प्रणालियों के बीच समन्वय पर ध्यान दिया जाता है, ताकि किसी भी तरह के अंतर या टकराव को समय पर सुलझाया जा सके। अनुबंध में ओआईएल की एचएसएसई आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाता है, ताकि ठेकेदार उनका सही तरीके से पालन कर सकें।

रिकॉर्ड रखना एवं दस्तावेजीकरण
रिकॉर्ड रखना एचएसई प्रबंधन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये रिकॉर्ड हमें कर्मचारियों, मशीनों और सामग्री की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करते हैं। साथ ही, ये पहले हुई घटनाओं और उनसे मिली सीख को याद रखने का काम भी करते हैं। रिकॉर्ड सूचना साझा करने का सबसे प्रभावी तरीका हैं और एक ही काम को बार-बार दोहराने में समय की बर्बादी रोकते हैं। लिखित रिपोर्ट लोगों को बताती है कि क्या करना है और कैसे करना है। इससे कर्मचारियों की एचएसई के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता भी दिखती है।

ऑनसाइट योजनाएँ
- साइट पर लागू विशेष आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना
- सुरक्षित कामकाज की प्रक्रिया
- एचएसएसई नियम और दिशा-निर्देश
ऑफसाइट योजनाएँ
- आपात स्थिति में मदद के लिए आपसी सहयोग योजना
- कॉर्पोरेट आपदा प्रबंधन योजना

दुर्घटना रिपोर्टिंग, जाँच एवं विश्लेषण
घटना/ दुर्घटना की रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड रखना एक प्रभावी और सुदृढ़ सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली का महत्वपूर्ण उपकरण है। इसका दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे हमें घटनाओं से सीखने का मौका मिलता है। जाँच के बाद किए गए मूल कारण विश्लेषण और सुधारात्मक उपायों से दुर्घटनाओं में कमी आती है, खतरों और जोखिमों को कम करने के लिए अतिरिक्त नियंत्रणों की आवश्यकता का पता चलता है और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में सुधार होता है। दुर्घटना जाँच का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना की रोकथाम है। इसमें वे सभी उपाय शामिल होते हैं जो जीवन की सुरक्षा करें, चोट से बचाएँ, चोट की गंभीरता को कम करें, संपत्ति को होने वाले नुकसान से बचाएँ और उत्पादक समय की हानि को रोकें।

व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण
जब कार्यस्थल पर किसी व्यक्ति की सुरक्षा या स्वास्थ्य के लिए खतरा हो, तो सबसे पहले ऐसे उपाय अपनाने चाहिए जो खतरे को कम या समाप्त कर सकें, जैसे इंजीनियरिंग नियंत्रण, बेहतर कार्य प्रक्रियाएँ और प्रशासनिक नियंत्रण। व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का इस्तेमाल केवल तब किया जाना चाहिए, जब ये उपाय खतरे को पूरी तरह से रोकने में सक्षम न हों। पीपीई का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के शरीर को खतरे से बचाना है, खतरे को खत्म करना नहीं। चूँकि पीपीई की प्रभावशीलता पर गलत इस्तेमाल या पहनने की स्थिति का असर पड़ सकता है, इसलिए इसे खतरे नियंत्रण के उपायों में अंतिम विकल्प माना जाता है। पीपीई अन्य उपायों का सहायक है, उनका विकल्प नहीं।

एचएसई प्रशिक्षण
ओआईएल कर्मचारियों और ठेकेदारों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देगा। यह जागरूकता दैनिक सुरक्षा या टूल बॉक्स बैठकों, ऑनसाइट प्रशिक्षण, पोस्टर, सूचना पट्टों और लक्षित अभियानों के माध्यम से समूह और व्यक्तिगत स्तर पर विकसित की जाएगी। इसके अलावा, ओआईएल सभी संबंधित कर्मियों को उपयुक्त सुरक्षा नेतृत्व और एचएसएसई जागरूकता प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।

मानक संचालन प्रक्रियाएँ
मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) उन कार्यों और प्रक्रियाओं के लिए लिखी गई चरणबद्ध मार्गदर्शिकाएँ हैं, जिनमें पहचाने गए खतरे शामिल होते हैं। किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले कर्मियों को उचित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन कराने में एसओपी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। एसओपी का सावधानीपूर्वक और पूर्ण पालन करने से कार्यस्थल पर मौजूद जोखिम और खतरे यथासंभव कम (एएलएआरपी स्तर तक) किए जा सकते हैं। इसके अलावा, एसओपी में लिखी गई कार्य प्रक्रियाएँ ओएमआर, ओआईएसडी मानक और अन्य सभी सांविधिक आवश्यकताओं को भी शामिल करती हैं।

व्यावसायिक स्वास्थ्य निगरानी
प्रबंधन योजनाओं और नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करना काफी हद तक कर्मचारियों की अनुकूलन क्षमता पर निर्भर करता है, क्योंकि वे कंपनी की प्रगति के मुख्य प्रेरक होते हैं। उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा उत्पादकता एवं प्रभावशीलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। कर्मचारियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए ओआईएल ने एक व्यवस्थित व्यावसायिक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली स्थापित की है, जिससे व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरों के संभावित नकारात्मक प्रभावों से बचाव के लिए वैज्ञानिक तरीके से निर्णय लिए जा सकें। ओआईएल में व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएँ अपनाई जाती हैं:
- दुलियाजन में एक ओएचएस (व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवा) केंद्र स्थापित है, जहाँ नियुक्ति से पहले, नियमित और सेवानिवृत्ति से पहले होने वाले चिकित्सीय परीक्षणों सहित कई गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
- चुने हुए कर्मचारियों के लिए विशेष परीक्षण जैसे—फेफड़ों की कार्यक्षमता, श्रवण क्षमता और दृष्टि परीक्षण आदि।
- प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण तथा व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरों एवं उनके निवारक उपायों से संबंधित अन्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन।
- मोरन, जोरहाट और सोनापुर जैसे तेल क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों के माध्यम से परिधीय क्षेत्रों में भी ओएचएस सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।

कर्मचारी सहभागिता
ओआईएल ने एचएसई प्रदर्शन सुदृढ़ करने के लिए सुरक्षा संस्कृति और सेफ्टी सर्कल के जरिए कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया है। इसके तहत कर्मचारियों को उनके दायित्वों और प्रतिबद्धता के माध्यम से सुरक्षा से जुड़े कार्यों में शामिल किया जाता है।
- विभिन्न सुरक्षा प्रेरणा कार्यक्रम और प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं।
- पिट स्तरीय, विभागीय और प्रबंधन सुरक्षा समिति बैठकों तथा त्रिपक्षीय बैठकों में कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।
- सुझाव योजनाओं के माध्यम से कर्मचारियों को अपने विचार और सुधारात्मक सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
- कर्मचारी संघों के साथ नियमित बैठकों के माध्यम से लगातार संवाद और समन्वय बनाए रखा जाता है।
पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली
- परिवेशी वायु गुणवत्ता की निगरानी की व्यवस्था
- डीजी सेटों के स्टैक की निगरानी
- प्रतिष्ठानों पर शोर स्तर की निगरानी
- ध्वनिक आवरण और साउंड बैरियर से शोर में कमी
- आंतरिक पर्यावरणीय ऑडिट
- जल आधारित ड्रिलिंग मड का उपयोग
- ई-कचरे का अधिकृत रीसाइक्लरों के माध्यम से सुरक्षित और वैज्ञानिक निपटान
- बैटरियों का अधिकृत रीसाइक्लरों के माध्यम से सुरक्षित निपटान
- खतरनाक अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान
- ड्रिलिंग प्रतिष्ठानों में ईटीपी (अपशिष्ट उपचार संयंत्र) की व्यवस्था
- फ्लेयर पिट्स को ढक दिया गया है, जिससे आसपास के क्षेत्र में गर्मी और प्रकाश का प्रभाव कम हो
- तेल के बिखराव के लिए आकस्मिकता योजना लागू है
- कुआं परित्याग नीति में वैधानिक दिशानिर्देशों के अनुसार स्थलों की पुनर्स्थापना शामिल है
- परित्यक्त कुओं के स्थलों पर बड़े स्तर पर वृक्षारोपण करना, जिससे जीएचजी उत्सर्जन कम हो तथा कार्बन उत्सर्जन की भरपाई हो सके
- कंपनी द्वारा विकसित बैक्टीरिया से तैलीय गाद का जैव उपचार
- वैधानिक प्राधिकरणों की सिफारिशों के अनुसार धंसाव एवं जैव विविधता का अध्ययन
- गैस, सौर एवं पवन ऊर्जा के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन
- विभिन्न प्रतिष्ठानों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा
- विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन एवं पालन
अग्नि सुरक्षा
तेल और गैस उद्योग में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आग से सुरक्षा, नुकसान की रोकथाम और नियंत्रण के सिद्धांतों पर आधारित होती है। इस उद्योग में अन्वेषण, ड्रिलिंग, उत्पादन, प्रोसेसिंग और परिवहन जैसे सभी कार्यों के हर स्तर पर आग का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, महत्वपूर्ण कार्यों की प्रकृति और प्रतिष्ठानों में बड़े भंडार होने से आग का जोखिम और बढ़ जाता है। यदि आग पर समय रहते काबू न पाया जाए या उसे जल्दी न बुझाया जाए, तो एक हिस्से में लगी आग पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है और आग के और फैलने की आशंका रहती है।
ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के तहत परिचालन क्षेत्रों, प्रतिष्ठानों और आसपास के समाज की सुरक्षा के लिए व्यापक उपाय किए गए हैं। अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा प्रणालियों के मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:
अग्निशमन केंद्र:ओआईएल ऊपरी असम के तेल और गैस क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए दुलियाजन और मोरान में दो पूरी तरह सुसज्जित अग्निशमन केंद्र चलाता है। इसके अलावा, कुमचाई, अरुणाचल प्रदेश में एक सैटेलाइट अग्निशमन केंद्र स्थापित किया गया है, जो अरुणाचल प्रदेश के तेल क्षेत्रों में आग से बचाव, सुरक्षा और अग्निशमन कार्यों को संभालता है। इसके अलावा, ओआईएल के दूरस्थ और बहुत दूरदराज़ परिचालन क्षेत्रों में आग लगने की स्थिति में तेज़ प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए, सेवा अनुबंध के तहत माकुम और टेंगाखाट में दो सैटेलाइट अग्निशमन केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।
ट्रैक रिकॉर्ड: ओआईएल फायर सर्विस का असम और अरुणाचल प्रदेश में स्थित ओआईएल के परिचालन क्षेत्रों में कुआँ अग्निकांड, अन्य बड़ी औद्योगिक आग की घटनाओं और सार्वजनिक अग्नि आपात स्थितियों पर काबू पाने में एक सराहनीय रिकॉर्ड रहा है।
फायर सर्विस 24×7 कार्य करती है और सभी प्रकार की अग्नि आपात स्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक और मजबूत अग्निशमन वाहनों तथा उपकरणों से पूरी तरह सुसज्जित है।
मान्यताएँ: Fदुलियाजन एवं मोरान स्थित अग्निशमन केंद्रों को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ-9001:2015), पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ-14001:2015) तथा व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ-45001:2018) के लिए आईएसओ प्रमाणन प्राप्त है।
सहयोगात्मक व्यवस्थाएँ:किसी भी बड़ी आग की घटना या विस्फोट की स्थिति में मदद के लिए पास के उद्योगों और राज्य अग्निशमन सेवाओं के साथ आपसी सहायता समझौते किए गए हैं। यह सहयोगी व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि दूरदराज़ क्षेत्रों में भी अग्नि आपात स्थिति के समय जरूरी सहायता समय पर उपलब्ध हो सके।
अग्निशमन प्रणालियाँ/ उपकरण: Iप्रतिष्ठानों में आवश्यक स्थिर और पोर्टेबल अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं। ये उपकरण ओआईएसडी, ओएमआर-2017, पीएनजीआरबी, बीआईएस, एनएफपीए, यूएल सूचीबद्ध जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों के अनुसार हैं। ये उपकरण/ प्रणालियाँ मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं:
- प्राथमिक (पोर्टेबल) अग्निशमन उपकरण
- स्थिर अग्निशमन प्रणालियाँ
- मोबाइल अग्निशमन वाहन एवं उपकरण
किसी भी प्रतिष्ठान के डिज़ाइन चरण से ही आवश्यक पोर्टेबल और स्थिर अग्निशमन उपकरणों/प्रणालियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। साथ ही, सांविधिक मानकों में समय-समय पर होने वाले बदलावों के अनुसार उनकी पर्याप्तता की समीक्षा विशेषज्ञ समिति द्वारा नियमित रूप से की जाती है।
अग्नि सुरक्षा ऑडिट: अग्नि सुरक्षा ऑडिट के तहत प्रतिष्ठानों/स्थापनाओं में मौजूद सभी संभावित आग के खतरों और संबंधित दस्तावेजों की एक व्यवस्थित और आलोचनात्मक समीक्षा की जाती है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि अग्नि सुरक्षा के मामले में प्रतिष्ठान का प्रबंधन कैसा है। ओआईएल में यह अग्नि सुरक्षा ऑडिट विभिन्न सांविधिक मानकों, कोड और प्रथाओं के अनुसार नियमित अंतराल पर की जाती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम: कर्मचारियों और सभी प्रतिष्ठानों के कर्मियों में आग से सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अग्निशमन कौशल विकसित करने के लिए पूरे वर्ष चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इसके अलावा, कंपनी के विभिन्न प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों और बाहरी उद्योगों के कर्मियों की अग्निशमन क्षमता बढ़ाने के लिए दुलियाजन स्थित केंद्रीय अग्निशमन केंद्र में सिमुलेटेड लाइव फायर फाइटिंग प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
इसके अलावा, ओआईएसडी-एसटीडी-176 के अनुसार नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ओआईएल के सभी फील्ड कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए 04-दिवसीय उन्नत अग्निशमन प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। इस प्रशिक्षण में सभी महत्वपूर्ण अग्निशमन सिद्धांतों और रणनीतियों के साथ-साथ ओआईएल के प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले सभी प्रमुख अग्निशमन उपकरणों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल होता है।
लाइव फायर प्रशिक्षण मैदान: व्यावहारिक अग्निशमन प्रशिक्षण की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए ओआईएल फायर सर्विस ने एक विशेष प्रशिक्षण मैदान विकसित किया है। इसमें कई सिमुलेटेड लाइव अग्निशमन मॉड्यूल लगाए गए हैं। इन मॉड्यूल्स में दाबयुक्त तेल और गैस की आपूर्ति की जाती है और इन्हें आग के स्रोत के संपर्क में लाकर आग उत्पन्न की जाती है।
प्रशिक्षण मैदान में वाटर रिंग मेन और विभिन्न स्थिर अग्निशमन प्रणालियाँ, जैसे हाइड्रेंट, जल/फोम मॉनिटर, वाटर स्प्रे सिस्टम, फोम पोरिंग सिस्टम आदि लगाई गई हैं, जिन्हें विभिन्न मॉड्यूल्स पर लगी लाइव आग बुझाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह का लाइव अक्निशमन प्रशिक्षण फील्ड कर्मचारियों का साहस और आत्मविश्वास बढ़ाता है, ताकि वे अपने-अपने प्रतिष्ठानों में उपलब्ध स्थिर अग्निशमन प्रणालियों का सही उपयोग करते हुए वास्तविक आग की आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपट सकें। ऑयल इंडिया लिमिटेड के विभिन्न प्रतिष्ठानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण मैदान में कई प्रकार के मॉड्यूल बनाए गए हैं। ये मॉड्यूल हैं:
| क्र.स | शीर्षक |
|---|---|
| 1. | क्रिसमस ट्री में आग लगना |
| 2. | टैंक में आग लगना |
| 3. | कॉलम में आग लगना |
| 4. | वर्टिकल फ्लैंज में आग लगना |
| 5. | होरिजॉन्टल फ्लैंज में आग लगना |
| 6. | पिट/ ब्रोचिंग में आग लगना |
| 7. | स्मोक हाउस |
| 8. | सुरंग |











































