
कृषि विकास और गांव गोद लेने पर परियोजना
असम कृषि विश्वविद्यालय और जिला कृषि विभाग के सहयोग से किसानों की आमदनी बढ़ाने और व्यावसायीकरण के लिए आधुनिक कृषि तरीकों को अपनाना, जिसमें बहु-फसल/फसल चक्र/नकदी फसल शामिल हैं। इसमें मुख्य गतिविधियाँ हैं: (i) उच्च उपज देने वाली साली (धान) और रबी (सर्दियों की सब्ज़ियाँ) की खेती के लिए खेत गोद लेना (ii) एकीकृत/जैविक खेती (iii) मॉडल व्यावसायिक नर्सरी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और उद्यमिता को बढ़ावा देती है और उच्च सामाजिक लाभ (एसआरओआई) सुनिश्चित करती है।
- 215 गांवों को अपनाया गया और 35,157 विभिन्न किसान समूहों के माध्यम से कृषि परिवारों को लाभ मिला।
कृषि विकास परियोजना की सफलता की कहानियाँ

परियोजना रुपांतर
उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक क्षेत्रों में स्वरोज़गार के अवसर तलाशे जाते हैं। मुख्य गतिविधियाँ हैं: (i) हथकरघा (ii) सब्सिडी से जुड़ी कृषि यंत्रीकरण (iii) सब्सिडी से जुड़ी कृषि उत्पाद परिवहन प्रणाली (iv) बायोफ्लोक मत्स्यपालन
कंप्यूटर केंद्र: कंप्यूटर केंद्र छात्रों को 3-6 महीने की विभिन्न अल्पावधि पाठ्यक्रम प्रदान करता है, जैसे: बेसिक कंप्यूटर, डीटीपी, वेब पेज डिज़ाइनिंग, टैली, सी लैंग्वेज, सी++, जावा, लिनक्स, विज़ुअल बेसिक और विज़ुअल बेसिक स्क्रिप्ट।
- 4,676 स्वयं-सहायता समूह (एसएचजी/जेएलजी) बनाए गए और 28,875 परिवारों को सहायता दी गई, जिनके लिए ओआईएल ने सब्सिडी, अन्य वित्तीय और सामग्री समर्थन प्रदान किया।
- लगभग 10,000 छात्रों को कंप्यूटर केंद्र के माध्यम से लाभ मिला।
सफलता की कहानियों का दस्तावेजीकरण
ओआईएल रुपांतरमहिलाओं और युवाओं को खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करना और नए कामकाजी अवसरों पर ध्यान देना।

ओआईएल जीविका
ओआईएल जीवनिका, अरुणाचल प्रदेश : पूर्वोत्तर भारत की पहली प्रेरित सामुदायिक-समूह आधारित सतत ग्रामीण आजीविका परियोजना, जो दियुन, चांगलांग जिले में लागू की गई है। इसकी मुख्य गतिविधियाँ हैं (मधुमक्खी पालन और शहद प्रसंस्करण, सरसों, स्थानीय दालें और मूल्य वर्धित उत्पाद)
ओआईएल जीवनिका, असम :तिनसुकिया जिले के दो ब्लॉकों में प्रायोगिक परियोजना। समहों पर ध्यान: मसाले, खट्टे फल, बांस और चाय
- अरुणाचल प्रदेश में 400 परिवारों और असम में 861 परिवार लाभान्वित।






























































