प्रोजेक्ट वसुंधरा: ऊपरी दिहिंग आरक्षित वन के लाखीपाथर क्षेत्र में 100 हेक्टेयर क्षतिग्रस्त वन भूमि पर पेड़ लगाए गए और 2 हेक्टेयर में बांस का उद्यान बनाया गया।
पद्मश्री जादव पायेंग को सीएसआर के तहत ओआईएल की हरित पहलों का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया।
सफेद पंख वाली बतख के संरक्षण के लिए शोध परियोजना चलाई गई।
सासोनी मेरबील ईको-टूरिज़्म परियोजना में स्थानीय लोगों की भागीदारी से गतिविधियाँ की गईं, जिससे पेड़-पौधों और वन्यजीवों को लाभ हुआ।
तिनसुकिया डंप यार्ड में 50,000 मीट्रिक टन पुराने कचरे का निपटान कर उसे उपयोगी संसाधनों में बदला गया।
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ओआईएल वसुंधरा और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों की झलक
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स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा: बायोमाइनिंग के माध्यम से नगरपालिका कचरे का निपटान एवं पुनर्वास।
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सफलता की कहानियां दर्ज करना
वनस्पति और वन्यजीवों के संतुलन में ओआईएल का योगदान