जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा
ऊर्जा प्रबंधन और ग्रीनहाउस गैस कम करने के उपायों के माध्यम से 2040 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करना
पानी का पुन: उपयोग
बचाए गए पानी का दोबारा इस्तेमाल करना, कोई पानी बर्बाद न करना और जोखिम को ध्यान में रखकर पानी का सही ढंग से प्रबंधन करना।
जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा
ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) 2040 तक स्कोप 1 और 2 उत्सर्जन को नेट-जीरो करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए कंपनी ऊर्जा बचत के उपाय कर रही है, उत्सर्जन कम कर रही है और नवीनीकरणीय ऊर्जा में निवेश कर रही है। ओआईएल अपने कामकाज को बेहतर बनाने के लिए उपकरण अपग्रेड कर रही है, गैस फ्लेयरिंग घटा रही है और 2040 तक 5-5.5 गीगावाट नवीनीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रख रही है। कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन, बायोफ्यूल और कार्बन अवशोषण परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। साथ ही 2025 तक नियमित फ्लेयरिंग को शून्य करने तथा पानी और कचरे के प्रबंधन को बेहतर बनाने का लक्ष्य है। ओआईएल की ईएसजी प्रबंधन प्रणाली जलवायु जोखिम कम करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार काम करने में मदद करती है, जिससे यह भारत के ऊर्जा बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

जैव विविधता
ओआईएल जैव विविधता के संरक्षण को प्राथमिकता देता है। इसके लिए कंपनी प्रोजेक्ट वसुंधरा चला रही है, जिसमें असम के 26 और राजस्थान के 9 कुओं का जीर्णोद्धार किया गया और डिग्बोई में 100 हेक्टेयर क्षेत्र में 2,50,000 देशी पेड़ लगाए गए। ओआईएल असम राज्य जैव विविधता बोर्ड और आईयूसीएन के साथ मिलकर पर्यावरण, विशेषकर सैकहोवा नेशनल पार्क पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन कर रहा है। कंपनी मशरूम की खेती और इको-टूरिज्म जैसी आजीविका के विकल्प भी बढ़ावा देती है और बंद पड़े कुओँ पर 78,000 पौधे लगाकर 507 टन सीओ₂ का अवशोषण करती है।

पानी का पुन: प्रयोग
कंपनी पानी के सतत इस्तेमाल को प्राथमिकता देती है। इसके लिए 8,700 कि.ली. प्रतिदिन क्षमता वाला एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाया गया है, ताकि साफ किया गया पानी दोबारा इस्तेमाल किया जा सके और शून्य तरल अपशिष्ट (जेडएलडी) का लक्ष्य पूरा हो। कंपनी बारिश का पानी इकट्ठा करती है, राजस्थान जैसे कम वाले पानी इलाकों में जोखिम कम करती है और ड्रिलिंग में पानी का दोबारा इस्तेमाल भी करती है। ओआईएल पानी बचाने के लिए प्रशिक्षण भी देता है, ताकि संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा मिल सके।

सर्कुलर इकोनॉमी
ओआईएल कचरा प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी पर ध्यान देता है। कंपनी रीसाइक्लिंग, बायोरिमेडिएशन और संसाधनों को दोबारा इस्तेमाल करने के जरिए यह काम करती है। ओआईएल तेल युक्त गाद को साफ करने और तेल निकालने वाले संयंत्र का इस्तेमाल करता है और भुवन मित्र कचरा प्रबंधन प्रणाली से ड्रिलिंग का कचरा सही तरीके से संभालता है, जिससे जमीन की जरूरत कम होती है। ओआईएल वर्कओवर फ्लूइड को रीसायकल करता है, गाद रिकवरी प्लांट का इस्तेमाल करता है और हानिकारक कचरे का निपटान पर्यावरण के नियमों के अनुसार करता है।

- साइटों पर हवा की गुणवत्ता की निगरानी करना
- डीजी सेटों से निकलने वाले धुएं या गैस की निगरानी करना
- साइटों पर शोर की मात्रा की निगरानी करना
- ध्वनि कम करने के लिए साउंड प्रूफ और अवरोधक का इस्तेमाल करना
- अंदरूनी पर्यावरण ऑडिट करना
- जल युक्त गाद का उपयोग करना
- ई-कचरे को सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से अधिकृत रीसायकलरों के जरिए निपटाना
- बैटरियों का अधिकृत रीसायकलरों के जरिए निपटान करना
- हानिकारक कचरे का निपटान करना
- ड्रिलिंग साइटों पर ईटीपी की सुविधा रखना
- फ्लेयर गड्ढों को घेरकर गर्मी और प्रकाश कम करना
- तेल रिसाव के लिए आपात योजना बनाना
- बंद कुओं की नीति के अनुसार साइटों को पुनर्स्थापित करना
- बंद कुओं पर ज्यादा पेड़ लगाकर जीएचजी उत्सर्जन कम करना और कार्बन उत्सर्जन को संतुलित करना
- आंतरिक रूप से बनाए बैक्टीरिया से तेल युक्त गाद का बायोरिमेडिएशन करना
- सांविधिक प्राधिकारियों की सिफारिश के अनुसार भूमि डूबाव और जैव विविधता का अध्ययन करना
- गैस, सौर और पवन ऊर्जा से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना
- विभिन्न साइटों पर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना
- विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन और पालन करना



















