ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) अपनी वैश्विक ईएसजी प्रतिबद्धताओं के तहत ऊर्जा क्षेत्र में सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। ये साझेदारियाँ पर्यावरण पर प्रभाव कम करने, समाज के कल्याण को बढ़ाने और शासन व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। वैश्विक संस्थाओं के सहयोग से ओआईएल कार्बन उत्सर्जन घटाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और नवीकरणीय ऊर्जा में नए समाधान अपनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। इसके साथ ही, कंपनी यह भी सुनिश्चित करती है कि उसका कामकाज अंतरराष्ट्रीय स्थिरता मानकों के अनुसार हो और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करे। इन सहयोगों के माध्यम से ओआईएल जिम्मेदार ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करने, समुदायों के लिए लाभ पहुँचाने और एक स्वच्छ व अधिक स्थिर भविष्य की दिशा में काम कर रहा है।
- संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पैक्ट (यूएनजीसी)
- ओजीडीसी
- टोटल एनर्जीज़ (एयूएसईए)
- ज़ीरो रूटीन फ्लेरिंग (जेडआरएफ) 2030
- आईबीबीआई

संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पैक्ट (यूएनजीसी)
ओआईएल संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पैक्ट (यूएनजीसी) का सदस्य बन गया है, जो विश्व की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट स्थिरता पहल है। एक हस्ताक्षरकर्ता के रूप में, ओआईएल मानवाधिकार, श्रम, पर्यावरण और भ्रष्टाचार-विरोध के क्षेत्रों में यूएनजीसी के दस सिद्धांतों के साथ अपने परिचालन और रणनीतियों को संरेखित करने की प्रतिबद्धता को दोहराता है, तथा संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) का समर्थन करता है। यह सहभागिता जिम्मेदार व्यावसायिक प्रथाओं और सतत विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

ओजीडीसी
ओआईएल ने सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है और ऑयल एंड गैस डीकार्बोनाइजेशन चार्टर (ओजीडीसी) से जुड़ने वाली दूसरी भारतीय तेल एवं गैस कंपनी बनी है। यह पहल वर्ष 2023 में कॉप-28 के दौरान शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना, कामकाज की दक्षता बढ़ाना और कम-कार्बन ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ना है। ओजीडीसी पर हस्ताक्षर करके ओआईएल ने 2040 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के अपने संकल्प को दोहराया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी कार्बन और मीथेन उत्सर्जन को कम करने तथा सतत ऊर्जा विकास के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना रही है। यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण के प्रति ओआईएल की मजबूत प्रतिबद्धता और ऊर्जा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अन्य कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के उसके प्रयासों को दर्शाती है।

टोटल एनर्जीज़ (एयूएसईए)
ओआईएल और टोटल एनर्जीज़ ने एक सहयोग समझौते के तहत भारत में ओआईएल के स्थलों पर मीथेन उत्सर्जन का पता लगाने और उसे मापने के लिए साझेदारी की है। इस पहल में टोटल एनर्जीज़ की उन्नत एयूएसईए तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसमें ड्रोन और हेलीकॉप्टर पर लगे सेंसरों की मदद से तेल एवं गैस सुविधाओं में व्यापक उत्सर्जन आकलन किया जाएगा। यह सहयोग उत्सर्जन कम करने के प्रति ओआईएल की सक्रिय प्रतिबद्धता को दर्शाता है और उसके व्यापक स्थिरता एवं पर्यावरण संरक्षण लक्ष्यों के अनुरूप है।

विश्व बैंक की ज़ीरो रूटीन फ्लेरिंग पहल
ओआईएल विश्व बैंक की 2030 तक ज़ीरो रूटीन फ्लेरिंग (जेडआरएफ) पहल का एक प्रतिबद्ध सदस्य है, जो सतत ऊर्जा प्रथाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। इस वैश्विक प्रयास के तहत, ओआईएल नियमित गैस फ्लेरिंग को समाप्त करने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और अपने परिचालन में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करता है। उन्नत तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग करते हुए, ओआईएल यह सुनिश्चित करता है कि संबद्ध गैस का कुशलतापूर्वक उपयोग या पुनः इंजेक्शन किया जाए, जो उसके व्यापक डीकार्बोनाइजेशन और पर्यावरण संरक्षण लक्ष्यों के अनुरूप है। यह सदस्यता भारत के ऊर्जा क्षेत्र में जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन और जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने में ओआईएल की सक्रिय भूमिका को और रेखांकित करती है।

इंडिया बिज़नेस एंड बायोडायवर्सिटी इनिशिएटिव (आईबीबीआई)
ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) इंडिया बिज़नेस एंड बायोडायवर्सिटी इनिशिएटिव (आईबीबीआई) से जुड़ गया है, जो एक राष्ट्रीय मंच है जिसमें ऐसे व्यवसाय शामिल होते हैं जो जैव विविधता संरक्षण को अपने कामकाज में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) द्वारा शुरू की गई और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा संचालित इस पहल का उद्देश्य कॉर्पोरेट प्रथाओं को कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के अनुरूप बनाना है। एक सदस्य के रूप में, ओआईएल जैव विविधता से जुड़े जोखिमों का आकलन और प्रबंधन करने, मापने योग्य संरक्षण लक्ष्य निर्धारित करने और अपनी संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में पारिस्थितिकी-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का संकल्प लेता है। यह कदम ओआईएल के व्यापक स्थिरता एजेंडे को और मजबूत करता है, जिसमें कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों को अपनाना शामिल है।